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I STRIVE TO MAKE THE WORLD A BETTER PLACE TO LIVE.

Tuesday, March 7, 2017

MY PSYCHOLOGY BEHIND CUTTING MY PROFITS.

 In 2010, I bought a few hundred shares of Reliance Communication @ Rs. 185.00 per share, now they are trading at around Rs. 35. But I am keeping them close to my heart in the hope that they will regain their lost glory of Rs. 750 per share.
 I bought 50 shares of Tata Elxsi for Rs.225 per share and sold them @Rs. 550. Now they are trading at around Rs 1450, so I have been practicing opposite to the famous yore, " Run your profits and cut your losses."
When I am in profit, I book it due to the fear that the profit will evaporate. In the case of Tata Elxsi and Well Spun India, I booked profit in the hope that I shall buy them again at dips, but they never saw dips before multiplying many times. Once I bought 700 shares of Gammon India with the target of reaping 10 times profit. The price of shares doubled in a year but I DID NOT SELL THEM KEEPING IN VIEW TEN TIMES TARGET, BUT they came down slowly and now trading below my purchase price for 4 or 5 years.
The experienced exhort that sticking to any rule will not guarantee profits always but sticking to a good rule will give you profits most of the times.
 Should I watch, 200 days moving average i.e. purchasing a share when it goes above its 200 days moving average and selling it when it goes below its 200 DMA.
I request the experienced friends to guide me.

Tuesday, February 7, 2017

बताइये आप किस श्रेणी में हैं?

1.लाख समझाओ, कुछ नहीं करता है। इस कोटि के महामानव बिरले ही पाये जाते हैं, लेकिन लोग इन्हें देखकर दूर से सलाम कर देते हैं।

2. जितना बताओ, उतना ही करता है जैसे:-  मजदूर, रिक्शा-चालक, ऑटो-चालक आदि। ये लोग जीवन-पर्यन्त  कठोर परिश्रम करने के बावजूद निर्धन होते हैं।

3. जितना बताओ, उतना अच्छे से अच्छे तरीके से करता है। अच्छी से अच्छी सेवा देने वाला व्यक्ति हर जगह ढूँढा  जाता है, अनेक बार हम दूसरी श्रेणी के दस चाय की दुकानों को छोड़कर किसी विशेष चाय की दुकान पर चाय पीने जाते हैं। इस श्रेणी के व्यक्ति काफी धन और यश कमा लेते हैं। 
4. बिना किसी के बताये ही करने योग्य कार्य कर देता है। ऐसे व्यक्ति बहुत ज्यादा यश और धन कमा लेते हैं।

5. भविष्य के अवसरों को भाँपकर कार्य पहले ही प्रारम्भ कर देता है। मार्क जुकरबर्ग, धीरू भाई अम्बानी आदि इस श्रेणी में आते हैं। 

खुद जाँचिए आप किस श्रेणी में हैं ? 
कौन श्रेणी बेहतर है?
बेहतर श्रेणी में आप कैसे जा सकते हैं?

Saturday, January 14, 2017

न रिवाल्वर ने मारा, न रंगदार ने मारा

उसे न तो रिवाल्वर ने मारा, न रंगदार ने मारा, उसे तो उसी के अति-आशावाद ने मार गिराया।

वह गोरा-चिट्टा और लम्बा युवक अत्यंत महत्त्वाकांक्षी था, तीक्ष्ण बुद्धि भी  था, तथा अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था। कोटा के एक अच्छे कोचिंग संस्थान में आई.आई.टी. प्रवेश-परीक्षा की तैयारी कर रहा था। सात सौ लड़कों के बैच में उसका रैंक लगभग चार सौ आया था। मुज़फ़्फ़रपुर लौटने हेतु उसकी टिकट कट चुकी थी।  बूढ़े माता-पिता बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहे थे।
अचानक, वह लापता हो गया। छान-बीन  करने पर उसके कमरे से एक सुसाइड-नोट मिला जिसमें उसने अपने-आपको दोषी और स्वार्थी माना था और लिखा था कि वह अपने माँ-पिता को चम्बल नदी के मंझधार में मिलेगा। पुलिस ने  चम्बल नदी में जाल डालकर उस बेचारे का क्षत-विक्षत शव निकाला। 
अवसाद आस्तीन का सांप होता है।  आजकल भाग-दौड़ वाली दुनिया में गला-काट स्पर्धा है। अतः अनेक लोग मनचाही  सफ़लता नहीं मिलने पर अवसादग्रस्त हो जाते हैं।
 अतः अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों पर नजर रखें। साथ ही " कर्मण्य अधिकारस्ते  माँ फलेषु कदाचना " बार-बार जोर से दुहराते रहें ताकि इसे आपके साथ आपके इष्ट-मित्र भी सुनें और उनके मनो-मस्तिष्क पर इसकी अमिट छाप पड़ जाये।
कितना भी भयानक भूकम्प अचानक आ जाये, मजबूत सरिये से बना मकान बच जाता है, इसी तरह अत्यन्त  खतरनाक अवसाद का झोंका भी शक्तिशाली संस्कारों से बने मस्तिष्क पर हावी नहीं हो पाता है। यदि आप   शक्तिशाली  संस्कार बनाना चाहते हैं तो अच्छी बातें  बार-बार पढ़ते, बोलते और सुनते  रहिये।
सभी तरह के छुपे अवसादों की कारगर दवा है," कर्मण्यअधिकारस्ते  माँ फलेषु कदाचना।  "
  कर्म करना हमारा अधिकार है, फल देना ईश्वर का अधिकार है और ईश्वर जो भी फल देंगे, उसे हम सहर्ष स्वीकार करेंगे और भविष्य में भी पूरी तन्मयता से कर्म करते रहेंगे।
 शांति, प्रेम, आनन्द।