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Thursday, December 7, 2017

कहीं भी और कभी भी करने वाले व्यायाम




अपने शरीर का ध्यान रखें, यही वह स्थान है, जहाँ आप रहते हैं.

                                                                                      —-      जिम रोन

आम अवधारणा है कि आप सुबह खाली पेट या फिर शाम में भोजन के  दो घंटे पश्चात ही व्यायाम कर सकते हैं। लेकिन, दिन भर बच्चों की तरह आप सक्रिय रहें, यह आपके स्वास्थ्य के लिए राम-बाण होगा।

उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों का जाम होना बड़ी समस्या पैदा करता है। यह दर्ददायक होने के साथ-साथ  नित्य-कर्म में भीषण कठिनाई का कारण बन जाता है। आप दिन में कभी भी निम्नलिखित व्यायाम करके लाभ उठा सकते हैं.
गर्दन को लचीला रखने वाले व्यायाम 
1 . अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे प्रत्येक घंटे में दो-तीन बार छत की ओर देखें। गर्दन झुकाकर लिखने-पढ़ने वालों के लिए यह लाभदायक है। योगासन पद्धति के अनुसार एक मुद्रा के उलटी मुद्रा कराई जाती है। जैसे यदि आप आगे झुकने वाले आसन करते हैं तो फिर आपको पीछे झुकने वाले आसन करने की सलाह दी जाती है। इसी तरह यह व्यायाम गर्दन झुकाकर कार्य करने से होने वाले spondilitis आदि दुष्परिणामों का शमन करता है। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।
2.  जब भी मौका मिले गर्दन को 90 डिग्री दाहिने, फिर 90 डिग्री बायें घुमाएँ। ऐसा दिन में दस से बीस बार तक करें।

कन्धों को स्वस्थ रखने वाले व्यायाम

  1.  अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर हथेलियों को स्पर्श करें. फिर दोनों हाथों को नीचे लाकर जांघों के बगल में स्पर्श करें. ऐसा तेजी से पांच-दस बार करें.
  2. दोनों हाथ पीठ के पीछे ले जायें, फिर उन्हें ऊपर गर्दन की ओर ले जाने का प्रयास करें . ऐसा पांच-दस बार करें.
उपरोक्त व्यायाम आपके कंधों को स्वस्थ रखते हैं और फ्रोजेन शोल्जर नामक बीमारी से बचाते हैं . इस बीमारी में कंधे जाम होने लगते हैं. परिणामस्वरूप हाथों को हिलाने में दर्द होता है. रोगी दर्द से बचने के लिए हाथों का मूवमेंट नहीं करता है, जिससे कंधे और जाम हो जाते हैं. मेरे चिकित्सक ने मुझे हाथों को हिलाने वाले अनेक तरह के व्यायाम बताये थे, जिनको छह महीने से ज्यादा करने पर मुझे फ्रोजेन शोल्जर से छुटकारा मिला.

अन्य व्यायाम

  1. हाथ की उँगलियों को यथासम्भव फैलायें. फिर दोनों मुठ्ठियाँ कसकर बांधें.
  2. मुट्ठियाँ बांधकर उन्हें घड़ी की दिशा और विपरीत दिशा में वृताकार घुमायें.
  3. बैठे-बैठे पैरों के पंजों को ऊपर उठायें, फिर उन्हें नीचे रखकर एड़ियों को ऊपर उठायें.
  4. पैरों की उँगलियों को यथासम्भव मोड़ें, फिर उन्हें सीधा करें.
  5. खुलकर हँसने और ताली बजाने के अवसर खोजें. ताली बजाते समय हथेलियों और उँगलियों को एक दूसरे से स्पर्श करायें.
उपरोक्त सभी व्यायाम दस-बीस बार सहजता से करें.
जहाँ सम्भव हो बैठने के बदले कुछ मिनट खड़ा रहें.
छोटी दूरियां  तेजी से टहलते हुए जायें.
मुंह धोते समय एक-एक मिनट क्रमशः दाहिने तथा बाएं पैर पर खड़े रहने का अभ्यास करें .
सारांश यह है कि प्रत्येक पल अपने शरीर के अंगों को सक्रिय रखने का अभ्यास करें और शरीर के सारे जोड़ों को यथासम्भव हिलाते रहें.
साथ-साथ नित्य सबेरे आधा घंटा तेज टहलना और योगासन करना न भूलें. मेरे प्रिय योगासन निम्नलिखित हैं.
ताड़ासन, उत्थान पादासन, भुजंगासन, शलभासन, शशांकासन और मर्जरी आसन.
साथियों, समस्या रहित यात्रा  के लिए आप अपने कार और बाइक का नियमित रख-रखाव  करते  हैं. कार लेकर कहीं निकलते हैं तो ध्यान रखते हैं की  उसमें कोई खरोंच न लग जाये . अच्छी गुणवत्ता वाला  पेट्रोल भरवाते हैं .
इसी तरह अपने  शरीर के रख-रखाव हेतु कुछ घंटे प्रतिदिन अवश्य निकालें  और  चौबीसों घंटे सातों दिन इसका ख्याल रखें , क्योंकि कार या  बाइक खराब हो गई तो आप नई खरीद लेंगे, लेकिन जीवन-यात्रा के लिए हमें तो बस यही  एकमात्र शरीर मिला है, यदि इसमें खराबी आएगी तो हमें दूसरा शरीर नहीं मिलेगा.
उपरोक्त विधियाँ आपके शरीर को स्वस्थ और मस्तिष्क को चुस्त रखने में अवश्य सहायता करेंगी . लेकिन ये सुझाव बिना किसी जिम्मेदारी के दिए जा रहे हैं. इन्हें प्रारम्भ करने के पहले यदि आवश्यक समझें तो किसी विशेषज्ञ से अवश्य सलाह ले लें.

Tuesday, December 5, 2017

किसने रखा है हमारा रिमोट-कण्ट्रोल





 मेरी अनुमति के बिना कोई भी मुझे ठेस नहीं पहुंचा सकता है.
--- महात्मा गाँधी 
मुझे वे दिन याद हैं, जब चैनल बदलने के लिये हमलोग दौड़-दौड़ कर टेलीविज़न के पास जाते थे. रिमोट-कण्ट्रोल आने से जिन्दगी आसान हो गयी. आप फिल्मी गाने का आनन्द ले रहे हैं, और समाचार देखने की इच्छा हुई, तुरत बटन दबाया और न्यूज़ चैनल पर चटपटे समाचार आने लगे.

हमारे साथ भी यही होता है. कोई व्यक्ति आकर कहता है," साहब! आपके जैसा नेक इंसान मैंने कभी नहीं देखा, आप तो साक्षात् ईश्वर के दूसरे रूप हैं. बस फिर क्या! हमारे तो पाँव ही जमीन पर नहीं पड़ते हैं. हम सातवें आसमान में उड़ने लगते हैं. जालसाज इसी कमजोरी का लाभ लेकर हमें कई बार ठग भी लेते हैं.

दूसरा व्यक्ति भौहें चढाये आता है और चिल्लाकर कहता है," आपके जैसा आलसी कहीं नहीं देखा. एक घंटे से मैं खड़ा हूँ, आप मेरा काम नहीं कर रहे हैं. बस फिर क्या! हम लड़ने पर आमादा हो जाते हैं. कार्य-स्थल पर तो दिन भर खीझ बनी ही रहती है, घर आकर बीबी-बच्चों पर भी गुस्सा उतारते हैं. यही नहीं सपनों में भी उसकी ऐसी-तैसी करते रहते हैं.

हमें आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है कि क्या हमारे मस्तिष्क और मूड का रिमोट कण्ट्रोल दूसरे रखेंगे?

क्या दूसरे जब चाहें हमें खुश कर देंगे या जब चाहें हमें दुखी या क्रोधित कर देंगे.


Sunday, December 3, 2017

क्या बैंक-खातों का नोमिनी सम्पूर्ण राशि रख सकता है?


मेरे एक पुराने मित्र ने कल बताया कि एक बुजुर्ग ने बैंक में अपनी एक पोती की शादी के लिए फिक्स-डिपोजिट किया था. उन्होंने खाते में पोती को नोमिनी भी बना दिया था ताकि उनके देहांत के बाद रुपयों का उपयोग उसकी शादी में ही हो. दुर्भाग्यवश बुजुर्ग का देहांत हो गया है, लेकिन फिक्स-डिपोजिट की राशि में शेष कानूनी उत्तराधिकारियों ने भी दावा ठोक दिया है. मेरे मित्र पूरे मामले का कानूनी पक्ष जानना चाह रहे थे.


बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के सेक्शन 45ZA(२) के अनुसार बैंक खातों में किसी एक व्यक्ति को नोमिनी बनाने का प्रावधान है. खातेदार अपने जीवन में नोमिनी बदल सकता है. यह अवधारणा है कि खातेदार की मृत्यु के बाद नोमिनी खाते की राशि का एकमात्र मालिक होता है.
कानून के अनुसार नोमिनी ट्रस्टी के रूप में खाते की राशि प्राप्त करता है और उसमें सारे कानूनी उत्तराधिकारियों का अधिकार होता है.
उच्चतम न्यायालय के विद्वान न्यायधिशों न्यायमूर्ति आफताब आलम तथा न्यायमूर्ति आर.एम.लोढ़ा की पीठ ने भी 2010 में सिविल अपील नंबर 1684/2004 राम चंदर तलवार बनाम देवेन्द्र कुमार तलवार में इसी आशय का फैसला सुनाया.
यद्यपि सक्षम न्यायालय द्वारा रोक लगाने के पहले यदि बैंक नोमिनी को भूगतान कर देता है तो वह अपने सारे दायित्यों से मुक्त हो जाता है.
अतः यदि आप अपनी सम्पत्ति का कोई हिस्सा विशेष उद्देश्य के लिए अपने किसी सम्बन्धी को देना चाहते हैं तो खाते में उसे नोमिनी बनाने के साथ-साथ एक वसीयत भी बनाकर उसमें इसका स्पष्ट वर्णन कर दीजिये.

क्लोनिंग से बचायें अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड


कुछ दिनों पहले समाचार-पत्र में पढ़ा था कि एक सज्जन का क्रेडिट कार्ड उनके पास सुरखित रखा था, फिर भी जालसाजों ने उनके खाते से रूपये 130,000 की खरीददारी कर ली थी. पुलिस-थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. पुलिस छान-बीन में जुटी थी.
आखिर ऐसा कैसे सम्भव है? कार्ड आपके पर्स में है. आपने पिन किसी को बताया नहीं तो मार्केटिंग कैसे हो गयी?
ऐसा क्लोनिंग के द्वारा सम्भव है. सबसे पहले डॉली नामक एक भेड़ की क्लोनिंग हुई थी. डॉली के शक्ल-सूर्त की हुबहू दूसरी भेड़ क्लोनिंग करके बनायी गयी थी.
अब अरब टके का प्रश्न यह है कि जालसाज आपके कार्ड की क्लोनिंग कैसे करते हैं?
जब आप मार्केटिंग करने या रुपया निकलने जाते हैं तो वे स्किम्मर की मदद से आपका डाटा चोरी कर लेते हैं. यह स्किम्मर एटीएम के कार्ड-रीडर के साथ अत्यंत सावधानी के साथ सटा कर रख दिया जाता है और एक विडियो कैमरा की-बोर्ड  की ओर लगा दिया जाता है.जब आप एटीएम में कार्ड डालते हैं तो स्किम्मर में आपके कार्ड का सारा डाटा चला जाता है. फिर पिन डालते समय विडियो कैमरे में आपका पिन रिकॉर्ड हो जाता है. अब जालसाज लैपटॉप में आपका डाटा ट्रान्सफर करके सस्ते कार्ड पर  डुप्लीकेट एटीएम  बना लेते हैं. विडियो कैमरे की मदद से आपका पिन लेकर आपका खाता खाली कर देते हैं.
आपके कार्ड का डाटा कई बड़े-बड़े मॉल और दुकानों में भी चुराया जाता है.  ऐसे मॉल या दुकान में जब आप खरीददारी करते हैं तो पॉश-मशीन में कार्ड स्वैप करने के पहले वे उसे डेस्कटॉप, प्रिंटर या किसी अन्य स्थान पर स्वैप करके आपके कार्ड का सारा डाटा चुरा लेते हैं. वे संभवतः मार्केटिंग उद्देश्य से आपके डाटा की चोरी करते हैं. लेकिन उनकी नियत बिगड़ जाये तो वे भी आपके कार्ड की क्लोनिंग कर ले सकते हैं और सामन्यतया हमलोग बिना हाथ से ढके पासवर्ड डालते हैं, जिसे विडियो कैमरे द्वारा आसानी से चुराकर आपका खाता खाली कर सकते हैं.
क्लोनिंग से बचने के लिए आप निम्नलिखित सुझावों का पालन करके लाभ उठा सकते हैं.
  1. यह सुनिश्चित कर लें कि एटीएम के कार्ड-रीडर से सटाकर तो कुछ नहीं रखा गया है.
  2. एटीएम में जब भी पिन डालें, दूसरे हाथ से ढककर डालें.
  3. फूटपाथ पर या घर-घर घुमने वालों के पॉश-मशीन पर अपना कार्ड स्वैप नहीं करें.
  4. प्रत्येक SMS को ध्यान से पढ़ें. यदि जलसाज आपके पैन कार्ड या सिम का डुप्लीकेट निकालने का प्रयास करेंगे तो आपको SMS अवश्य भेजा जाएगा।
  5. यदि आपका कार्ड पॉश मशीन के अलावा दुकानदार अन्य कहीं स्वैप करे तो उससे इसका कारण पूछकर उसे हतोत्साहित करें। 
     

Tuesday, November 28, 2017

तेजी से काम निपटायें



प्राचीन काल में राजा-महाराजा हर पल अपने खूबसूरत म्यान में तेज धार वाली तलवार रखते थे.शत्रु पर निगाहें पड़ते ही वे उसको नरकवासी बना देते थे. यदि कोई शत्रु अत्यंत शक्तिशाली होता था तो वे धैर्यपूर्वक अपनी शक्ति बढ़ाते रहते थे. साथ ही दुश्मन के कैंप में जासूस भेज कर और उसकी टीम में फूट डलवाकर उसे कमजोर भी करते रहते थे. फिर सही समय पर आक्रमण करके वे उसकी खाट खड़ी कर देते थे.

हम भी किसी योद्धा से कम नहीं है. प्रातः से रात्रि तक हम समस्याओं से दो-चार होते रहते हैं. अतः यह अतिआवश्यक है कि समस्या को देखते ही हम भी उस पर टूट पड़ें और समाधान निकाल कर ही चैन की सांस लें .
यदि किसी समस्या का अविलम्ब समाधान न भी नजर आये तो हिम्मत हारे बिना आप उचित समय तक इंतजार करें और इस बीच समस्या-समाधान की दिशा में लगातार प्रयास करते रहें. साधारण दीमक भी छोटे-छोटे प्रहार करके भव्य इमारतों को जमींदोज कर देते हैं.

हमलोग तो ईश्वर के प्रतिरूप हैं. संसार के बुद्धिमानत्तम प्राणी हैं. हमलोगों ने चाँद और मंगल पर अपने उपग्रह भेजे हैं; धरती माँ के सीने से हीरे और प्लेटिनम के खदान निकाले हैं. फिर हमारे पुरुषार्थ के सामने कोई समस्या कैसे टिक पाएगी?

समय पर ध्यान नहीं देने से साधारण दीखने वाली गाँठ कैंसर भी बन जाती है. इसी तरह साधारण समस्याएँ भी अविलम्ब नहीं सुलझाने पर विकराल रूप ले लेती हैं और हमारे दिनों की चैन और रातों की नींद छीन लेती हैं.

अतः बुद्धिमान मनुष्य समस्याओं को योजनाबद्ध रूप में तेजी से सुलझाते जाते हैं. जितनी तेजी से समस्याएँ सुलझाने का आप अभ्यास करेंगे, शानदार सफलताएँ उतनी ही तत्परता से आपको जयमालाएं पहनायेंगी।



Monday, October 23, 2017

वर्तमान साधेंगे, ब्रह्माण्ड सधेगा।

बीता कल इतिहास है, आने वाला कल रहस्य है। और आज? आज ईश्वर का उपहार है। इसीलिए इसे "Present " कहते हैं। 
--- बी. ओलातुनजी। 
आप आज जो भी कर रहे हैं, यह आपके आने वाले कल को सुधार सकता है। 
राल्फ मास्टर्न। 



वर्तमान  के महत्व को दर्शाती हुई अंग्रेजी में एक प्रसिद्ध कहावत है ," अपने  पुल  तभी पार करें, जब आप वहाँ  पहुँचे। " 

प्रत्येक पुल  वर्तमान साधने का  प्रभावशाली उदाहरण भी  प्रस्तुत करता है।  उदाहरण के लिए  हावड़ा  पुल  को ही लीजिये।  इस पर चालीस लाख पैदल चलने वाले और लगभग डेढ़ लाख गाड़ियां प्रतिदिन पार करती हैं।  अगर कल पार की हुईं सारी  सवारियाँ  और आने वाले कल में आने वाली सारी  सवारियाँ पुल पर एक साथ  इकट्ठा  हो  जायेंगी  तो क्या होगा? शायद  1943 से सीना तने खड़ा यह शक्तिशाली पुल  माचिस की डिब्बी की तरह धराशायी हो जायेगा। 

हमारी मानसिक  वेदनाओं  का  भी यही  मुख्य कारण  है।  हम वर्तमान की समस्याओं , भूत काल  के पश्चातापों और भविष्य की आशंकाओं का बोझ एक साथ अपने मस्तिष्क पर डाले रहते हैं। 

किसी ने सच ही कहा है कि  भूत काल लैप्स्ड चेक है और भविष्य काल पोस्ट-डेटेड चेक है।  सिर्फ वर्तमान ही ऐसा चेक है जिसे आप अभी भुना सकते हैं। 
बीता  हुआ कल कभी हमारा वर्तमान था , जिन्होंने उसका सदुपयोग किया , उनकी भूतकाल की यादें भी मधुर बन गयीं।  जो आज वर्तमान का पूर्ण दोहन कर रहे हैं , वे  भविष्य  में आने वाले आज का भी  भरपूर उपयोग  करेंगे।  अतः  वर्तमान पर  ध्यान एकाग्र करने की आदत आपके भूतकाल की यादों के साथ-साथ आपका भविष्य भी सुनहला बना देगी। 
यद्यपि भूतकाल से सबक लेना और SWOT विश्लेषण कर भविष्य की योजनाएँ बनाना वर्तमान का सदुपयोग ही कहलाता है।   
वर्तमान पर ध्यान एकाग्र करने की आसान विधि यह है कि जब भी  आपका मस्तिष्क खाली  हो , "वर्तमान साधेंगे , ब्रह्माण्ड सधेगा " पूरी तन्मयता के साथ  नारे की तरह दुहराते रहिये।  यदि आप एकांत में हैं तो थोड़ी ऊँची आवाज में दुहराइये ताकि आपके कान  भी इस विचार को आपके अवचेतन मन में बैठाने में आपकी मदद करें।  कुछ दिनों में  भूतकाल और भविष्य की प्रताड़नाओं से  आप काफी हद तक मुक्त हो जायेंगे।  
नोट: SWOT  विश्लेषण का मतलब STRENGTH, WEAKNESS, OPPORTUNITY तथा THREATS का विश्लेषण है। 


Sunday, October 8, 2017

क्या निजीकरण है, सारी समस्याओं का समाधान ?

कुछ उत्साही लोग निजीकरण का जोर-शोर से समर्थन करते हैं।

लेकिन, रेल में निजीकरण का प्रयोग पूरी तरह असफल हो चुका है। निजीकरण के बाद रेलों में मनमानी वसूली के बावजूद घटिया भोजन की शिकायत तो आम बात है ही जब से बेड-रॉल निजी हाथों में गए हैं, उनकी गन्दगी की कहानियाँ भी कुख्यात होती रही हैं।

अनेक निजी व्यवस्था वाले शौचालयों में अनुचित वसूली के बावजूद दुर्गंध का राज होता है।

निजी विद्यालयों और अस्पतालों में किस तरह चार्ज वसूले जाते हैं। यह किसी से छुपा नहीं है।

निजीकरण अमरीका जैसे पूंजीवादी देशों में भी अपना भद्दा रूप दिखा चूका है। मंदी के दौरान लेमैन ब्रदर्स, ए  आई जी जैसी बड़ी कम्पनियाँ धड़ाम हो गईं। अमेरिकन फेडरल सरकार ने 180 बिलियन डॉलर की सहायता कर AIG को उबारा और उसका नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। भारत में भी पूंजीपति अपने निजी कंपनियों के माध्यम से अरबों-खरबों के इंसेंटिव लेते रहे हैं, सरकारी बैंकों में पूंजी देते समय अनावश्यक शोर-शराबा होता है। पूंजीपतियों को इंसेंटिव मुफ्त में बांटे जाते हैं, जबकि सरकारी बैंक सामाजिक बैंकिंग सेवा भी देते हैं और  सरकार को  प्राप्त पूंजी पर डिविडेंड भी देते हैं।

निजी व्यवस्था ATM के केअर टेकरस का जम कर शोषण कर रही है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार बैंकों से पूंजीपतियों को प्रति केअर टेकर जितनी राशि दी जाती है, केअर टेकर के जेब में उसकी आधी से भी कम राशि जाती है।

संविधान-निर्माताओं ने हमारे देश को कल्याणकारी राज्य का दर्जा दिया है। निजी कम्पनियों द्वारा किये जा रहे शोषण के कृत्य संविधान की भावनाओं के विपरीत हैं।

अनेक बार पूंजीपति लिमिटेड कम्पनियां बनाकर उनका दोहन करते हैं, फिर कम्पनियाँ दिवालिया घोषित कर दी जाती हैं, उसमें काम करने वाले सड़क पर आ जाते हैं और उनके बच्चे भूखे मरते हैं, जबकि पूंजीपतियों के ऐशो-आराम में कोई फर्क नहीं पड़ता है। हाल में दिवालिया हुई किंगफ़िशर एयरलाइन इसका उदाहरण है।

भारत में सैकड़ों निजी बैंक भी फेल हो चुके हैं। असफल होने वाले कुछ बैंकों के नाम हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक लिमिटेड, नेदुंगड़ी बैंक लिमिटेड, बनारस बैंक लिमिटेड, ग्लोबल ट्रस्ट बैंक लिमिटेड आदि हैं। आम जनता की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने इनका विलय सरकारी बैंकों में कर दिया। इस तरह पूंजीपतियों के कुव्यवस्था और मनमानी से डूबे निजी बैंकों का बोझ भी सरकारी बैंकों ने जनहित में ढोया।

 निजीकरण में स्वार्थी व्यक्ति येन-केन प्रकारेण ज्यादा से ज्यादा लाभ अर्जित करते हैं और यह निर्धनों के शोषण का जबरदस्त माध्यम है।
यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी से अनुचित राशि लेता है तो भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के सेक्शन 7  में
उस कर्मचारी को 3 से 7 वर्ष तक कारावास में रखने का प्रावधान है। लेकिन निजी व्यक्ति किसी से अनुचित वसूली करता है तो वह विजिलेंस या सी.बी.आई. के दायरे में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के अंतर्गत नहीं आता है और न ही उसके लिए इतने कड़े दंड का प्रावधान है। अतः निजीकरण उपरोक्त कारणों से लूट की खुली छूट देता है। 

Saturday, October 7, 2017

सुसंस्कारों का अभेद्य किला बनायें।




प्राचीन काल के सम्राट अपने राज्य के चारों ओर सुदृढ़ किले बनवाते थे। उनकी ऊँची और मजबूत दीवारों से टकराकर शत्रु के तीर निष्प्रभावी  हो जाते थे। प्रशिक्षित बहादुर लड़ाके हर पल किलों की सुरक्षा में तैनात रहते थे और शत्रु को देखते ही उसपर टूट पड़ते थे। 
इसी तरह नकारात्मक विचारों से बचने के लिए हमें भी अपने मस्तिष्क के चारों ओर सुसंस्कारों का अभेद्य किला बनाने की आवश्यकता है। हमें सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों से मित्रता के साथ-साथ धार्मिक और प्रेरक साहित्य हमेशा पढ़ते रहना चाहिए ताकि शैतानी विचारों वाले विष बुझे तीर सुसंस्कारों से टकराकर निरर्थक हो जायें। 
सकारात्मक विचारों के लगातार प्रहार से भी नकारात्मक विचार निष्प्रभावी हो जाते हैं। अतः नकारात्मक विचार जब भी आक्रमण करें तो आप उन्हें निम्नलिखित शक्तिशाली  नारों से परास्त कर दें। 

1. वर्तमान साधेंगे, ब्रह्माण्ड सधेगा। 
2. मीरा ने पिया विष का प्याला, विष को अमृत कर डाला। 
3. अग्रसोची, सदा सुखी। 
4. जो हुआ अच्छा हुआ, जो होगा वह भी अच्छा ही होगा। 
5. जलता दीपक बनें और सभी सड़े विचार जला दें। 

मैं इन नारों को दुहराते हुए अपनी ऊँगली का एक पोर हल्के से दबाता रहता हूँ। यह एंकर जैसा कार्य करता है, अतः जब मैं नारे दुहराने की स्थिति में नहीं रहता हूँ तो सिर्फ ऊँगली का वह पोर हल्के से दबाता हूँ, अवचेतन मन संबंधित नारा स्वतः  दुहराने लगता है।
एंकरिंग के सिद्धांत का आप भी पूर्ण दोहन कर सकते हैं।

Saturday, September 30, 2017

घात लगाए बैठी है, शैतान की नानी।

दुर्घटनाएँ अक्सर निश्चिंत को भयानक ढंग से फँसातीं हैं।

                                                       --- एंड्रू डैविडसन 

कदम-कदम पर शैतान की नानी बैठी है। कहाँ हम पर हमला करेगी, कह नहीं सकते। 
कुछ दिन पहले एक xylo को पुलिस ने राष्ट्रीय उच्च पथ 28  पर रोका। पुलिस के ५-६ जवान xylo की तलाशी ले रहे थे, तभी तेज गति से आ रही एक ट्रक ने  xylo को रौंद दिया, 5  लोग अविलम्ब दुनिया छोड़ गए। अनेक लोग गम्भीर हालात में अस्पताल में भर्ती थे।
मैं एक दिन बोरिंग रोड चौराहा पार कर रहा था। मोबाइल पर एक फ़ोन आया।  मेरे ध्यान बँट गया। इसी बीच एक कार ने मुझे धक्का मार दिया। कार की साइड-मिरर मेरे सिर के दाहिने हिस्से से टकराई। मैं बेहोश होकर सड़क पर गिर गया। पूरे शरीर में 5-7 जगह पर चोटें आईं। लगभग 20 दिन परेशान रहा। 6.59 बजे शाम में मैं ठीक-ठाक था। 7.03 बजे दुर्घटना में घायल हो चुका था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि कार की साइड मिरर मेरे सिर में टकराई थी तो काफी जोर की आवाज हुई थी और मैं बेहोश हो गया था। इस तरह तो मेरी जान सलामत रह गई, यह बड़ी बात थी।
पलक झपकते भयानक दुर्घटनाएं हो जाती हैं, क्योंकि शैतान की नानी हमें नुकसान पहुँचाने के लिए हमेशा घात लगाए बैठी रहती है। थोड़ी सी भी चूक हुई नहीं कि वह दुर्घटना के रूप में हमें अपने शैतानी आगोश में ले लेती है। 
अतः समय की मांग है कि हम दुर्घटनाओं के बारे में पढ़कर यह न सोचें कि ऐसा हमारे साथ नहीं होगा, बल्कि यह सोचें कि दुर्घटनाएँ कहीं भी और कभी भी हो सकती हैं और उनसे बचने के लिए हर पल न सिर्फ सतर्क रहें बल्कि दूरदर्शिता भी दिखायें। 



Monday, August 28, 2017

बचपन के दिन क्यों सुहाने होते हैं?



बचपन के दिन क्यों सुहाने होते हैं और हर ख़ुशी हर गम से बेगाने होते हैं, क्योंकि बच्चे प्रत्येक परिस्थिति में आनंद उठाना जानते हैं। 

बच्चों में भूलने और क्षमा करने की जबरदस्त क्षमता होती है। आप किसी बच्चे को एक चाँटा दे भी देंगे तो थोड़ी देर रोकर वह फिर आपके साथ खेलने लगेगा मानो कुछ हुआ ही नहीं हो। 

एक बालक कागज की नाव पाकर चहकने लगता है, जबकि बड़े एक असली जहाज पाने के बाद  दूसरे जहाज  के लिए बेचैन हो जाते हैं। 

बच्चे हमेशा वर्तमान में जीते हैं, जबकि बड़े भूतकाल की गलतियों और भविष्य की आशंकाओं के भारी बोझ से दबकर कराहते रहते हैं। 

आइये कुछ पलों के लिए अपनी समस्याओं को भूलकर इस  नाचती प्यारी गुड़िया के साथ अपने बचपन में लौट जाएँ। 

Sunday, August 27, 2017

अपना मस्तक ऊँचा रखें




   आप अपने व्यक्तित्व को दो प्रकार से  निखार सकते हैं।
1. अपने कार्यकलापों को बदल दें।
  
2. अपने विचारों को बदल दें। 

एक विश्वप्रसिद्ध कहावत है," एक सोच रोपें एक कार्य उपजेगा; एक कार्य रोपें, एक आदत पैदा होगी; एक आदत रोपें, एक चरित्र पायें और एक चरित्र रोपकर अपना भाग्य काट लें।

लेकिन, सोचने की महीन प्रक्रिया पर नियंत्रण रख पाना अत्यंत कठिन होता है। अतः बुद्धिमानगण अच्छी पुस्तकें पढ़ने और सकारात्मक लोगों के संग रहने की सलाह देते हैं। लेकिन, सही सोच वाले लोगों को विनाशकारी विचारों से रक्षा करने के लिए हम हर पल अपने पास नहीं रख सकते हैं।

नकारत्मक सोच जब हावी होते हैं तो हमारा मस्तक नीचे झुक जाता है।
अतः नकारात्मक विचारों के हमले को रोकने के लिए हमेशा सीना ताने रहें और मुस्कराते हुए मस्तक ऊँचा रखें।

मुस्कराहटयुक्त ऊँचा मस्तक न सिर्फ आपके अंग-विन्यास और आपके स्वास्थ्य को ठीक रखता है बल्कि  
अवसादग्रस्त विचारों को भी रोक देता है।

आपका ऊँचा मस्तक अबसेंटमिन्डेडनेस को हावी नहीं होने देता है।
आपका ऊँचा मस्तक आपको सकारात्मक विचारों से सराबोर रखता है।

 सकारात्मक विचारों को अनुकरणीय कार्य-कलाप में परिणत कर देने वालों का संसार अत्यंत सम्मान करता है।