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Sunday, September 21, 2014

बीमारियों में जड़ी-बूटियों का उपयोग, कितना उचित ?


मुझे मधुमेह हुआ तो मेरे अनेक शुभचिंतकों ने अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियों के बारे अवांछित सलाह दी। मेरे एक मित्र ने पूरे विश्वास के साथ भरोसा दिलाया कि बेल-पत्र की कोंपल मधुमेह पर जादू जैसा असर डालती है। चूँकि मूझे पता था कि बेल-पत्र की कोंपल का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है, अतः मैंने इसे आजमाया, मुझे तो मधुमेह में इससे कोई लाभ नहीं हुआ।

उपरोक्त विषय पर मेरे एक सम्बन्धी जो एम.बी.बी.एस., एम.डी. चिकित्सक हैं. उनका कहना है कि मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों में जड़ी-बूटियों के उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि उनके गुण-दोषों को परखने के लिए कोई रिसर्च नहीं किया गया है . कुछ जड़ी-बूटियों के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जैसे कुछ लोग मानते हैं कि करैले का रस ज्यादा पीने से किडनियां फेल हो सकती हैं. यद्यपि इस पर शायद कोई रिसर्च नहीं हुआ होगा।

 एक बार मेरे एक मित्र ने मुझे बताया कि एक जड़ी-बूटी बेचने वाला घुटने के दर्द की राम-बाण दवा बेच रहा है। उस दुकान पर जाकर मैंने भी दवा खरीद ली।  दुकानदार दवा की तारीफ में एक से बढ़कर एक कशीदे काढ़ रहा था, लेकिन उसने दवा में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों का नाम नहीं बताया और कहा कि यह ट्रेड-सेक्रेट है।  कुछ दिन दवा  खाने के बाद मेरा दर्द तो ठीक गया, लेकिन मैं अजीब नशे जैसी हालत में रहने लगा।  मेरे एक मित्र को जब यह पता चला तो उसने बताया कि वही दवा खाने के बाद उसके पिताजी के दोनों पैर चेहरा सहित सूज गए थे। चिकित्सक के सलाह पर दवा बन्द करते ही उनकी सूजन ठीक हो गयी।
मेरे अनुजतुल्य चन्द्रशेखर ने इस विषय पर अपना निम्नलिखित अनुभव बताया।
मै पत्नी के पैर दर्द की दवा मोतिहारी के एक नामी आयुर्वेदिक चिकित्सक से लेता था और दर्द शीघ्र  ठीक हो जाता था। अतः पत्नी भी खुश हो जाती थी और मै भी निश्चिन्त हो जाता था। एक दिन पत्नी ने बताया कि दवा लेने के बाद पैर दर्द तो चला जाता है पर पेट में दर्द होने लगता है। यह सुनकर मेरा माथा ठनका। मै इसके पीछे पड़ा तो पता चला कि इसमें पेन किलर के टेबलेट को पीसकर मिलाया जाता था। मै ढगा महसूश करने लगा। 
कभी भी आयुर्वेदिक दवा लोकल बनाया हुआ नहीं लेनी चाहिए। हमेशा ब्रांडेड कम्पनियों जैसे डाबर ,झंडू या पतंजलि का ही लेना चाहिए।
अतः फुटपाथ आदि पर जड़ी-बूटियां बेच रहे नीम-हकीमों के सब्ज-बाग मेँ आकर अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ न करें। यदि आयुर्वदिक दवा खाना चाहें तो मशहूर कंपनियों की दवायें शिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक की देख-रेख में खाएं। मैनें दादी-नानी  के नुस्खों को भी एक सीमा तक लाभप्रद पाया है, इन्हें लेते समय कम से कम आपको इतना पता तो रहता ही है कि आप क्या ले रहे हैं ?


1 comment:

  1. Long Back there was so czalled doctor in rishikesh with Guarantee to treat epileptics & eradicate it from root. He was using name of Dr. Radha Krishnan's wife, who was treated by him. I was epileptic since long & willing to go to him. Just before visiting I called BM, B/O- Rishikesh maintaining his account. He informed that people are satisfied, but one thing is strange that he is remitting heavy money to CIPLA Co. for some purchases. I immediately smelt that he was purchasing "STEOROIDS" powder. Lateron it was confirmed in a raid by execise & I.Tax. So we must not have any faith in any person whose medicines are not tested & named.

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