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Monday, November 7, 2016

कौन थी वो जेबकतरी?

19 अगस्त, 2016 को मैं एक भीड़-भाड़ वाली जगह पर गया। वहाँ  अनेक स्थानों पर "पॉकेटमारों से सावधान "लिखा हुआ था ;रूटीन चेतावनी मानकर  मैंने इसपर ध्यान नहीं दिया। मेरी  धर्मपत्नी और छोटा सुपुत्र रौनक भी मेरे साथ था। मैं अपनी मैडम के पीछे-पीछे कतार में चल रहा था। तभी एक साँवली युवती  दूसरे कतार से मेरे पत्नी के पीछे चलने लगी। लड़की है, यह सोचकर मैंने विशेष ध्यान नहीं दिया।  धीरे-धीरे अनेक युवतियाँ मेरे और मेरी अर्धांगिनी  के बीच में आ गयीं। रौनक मेरे ठीक पीछे था। रास्ते में थोड़ी दूर आगे मिनरल जल की बोतल दस रूपये प्रति बोतल की दर से बिक रहा था। मेरे और मेरी पत्नी के बीच की दो-तीन लड़कियाँ मिनरल जल खरीदने लगीं और साथ ही साथ हम लोगों की तरफ देख भी रही थीं।  दस रूपये बोतल मिनरल जल खरीदने का लोभ मैं भी सँवरण नहीं कर पाया। मैनें और रौनक ने एक-एक बोतल जल खरीदा।  इस  दौरान  हमारा  ध्यान  मैडम  पर  से  कुछ  समय  के  लिए  हट  गया। 

थोड़ी दूर आगे अब मेरी अर्धांगिनी अकेले चल रही थीं  और उनका हरा  हैंडबैग  उनके  दाहिने कन्धे से लटक रहा था ।  उनके पीछे की लड़कियां न जाने  कहाँ  उड़ गयी थीं।  रौनक ने अपनी  माताश्री  को रोका, फिर हम साथ चलने लगे। दर्शन करके हमलोग बाहर निकले। कैफ-कॉफ़ी हाउस में  गरमा -गरम  कॉफी  का  मजा  लेने के थोड़ी देर बाद हम लोगों ने स्वादिष्ट भोजन किया और होटल जाकर सो गए। उठने के बाद धर्मपत्नी ने किसी काम से अपना हैण्ड-बैग खोला तो उनका पर्स  लापता था। हमलोग फिर मन्दिर में गए। वहां के सुरक्षा अधिकारी के पास अनेकों खाली पर्स पड़े थे, लेकिन  उनमें हमारा पर्स नहीं मिला। 

बाद में इस दुर्घटना के बारे में विवेचना करने पर पाया कि मेरी यह सोच कि लड़कियाँ चोरी नहीं करेंगी और अगर इतनी भीड़ में कोई चोरी करेगा तो कोई न कोई देख ही लेगा ; गलत थी, जिस कारण हमलोग जेबकतरियों के गैंग के शिकार हो गए  और  उन्होंने  हैंडबैग  बड़ी  सफाई  से  खोलकर  पर्स  निकाल लिया  और  फिर  हैंडबैग  बन्द  भी  कर  दिया।  बाद  में  दुकानदारों  ने बताया  कि  वहाँ  ऐसे  निपुण  पॉकेटमार  हैं  जो  रास्ता  चलते  लोगों  का  पर्स  भी  बड़ी  सफाई  से  मार  देते  हैं।  एक  विशेष  बात  यह  भी  हुई थी  कि  वहाँ  मौजूद  अनेक  लोगों  ने  गेट  संख्या  2 से  दर्शन  करने  जाने  की  सलाह  दी  थी।  अतः  आप  जब  साईं  बाबा  के दर्शन  करने  शिरडी  जब  भी जाएँ  तो  अन्य  गेटों  से  दर्शन  करने  की  सम्भावना  पर  विचार  करें। 

अगले दिन हमलोग शनि मन्दिर में दर्शन करने गए।  दर्शन के बाद पत्नी एक पेड़ के नीचे  चबूतरे पर बैठी थी। तभी  स्मार्ट  कपड़ों  में एक अनजान खूबसूरत युवती आकर मेरी पत्नी के बगल में बैठ गई।  चूँकि मैं दूध का जला  था अतः मैनें मट्ठा भी फूँक-फूँक कर पीने की ठानी। मैं तुरत आकर वाइफ के सामने खड़ा होकर बात करने लगा। वह लड़की एक मिनट के अंदर उठकर चल दी। 

मेरे कई परिचित चलती ट्रेन में चोरों के शिकार हो चुके हैं। वे ऊपर वाली सीट पर सामान रखकर  बैठे थे। कुछ चोर ऊपर वाली सीट पर पालथी मारकर बैठ गए और समाचारपत्र पढ़ने लगे। इसी बीच न जाने कब वे सूटकेस का ताला खोलकर सारा कीमती सामान निकाल  कर  चम्पत  हो  गए।  यद्यपि उन्होंने यह अनुभव मेरी गृहणी का पर्स चोरी होने के बाद बताया। 

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